वो शाम को एक प्याली चाय में
पूरे दिन की तल्खियों को डुबाना।
वो उस चाय की चुस्कियों में..
कभी कभी खुद ही डूब जाना।
दिन भर की तन्हाइयों का लेखा जोखा
उस एक प्याली चाय में मिला देना।
कभी शक्कर कम कभी दूध ज्यादा..
कितना मुश्किल है स्वादिष्ट चाय बनाना।
सोचती हूँ इतना आसान भी कहाँ है
ज़िन्दगी तेरा एक प्याली चाय सा होना।