अज़ब कितनी चूल्हे की राख होती है
अंदर सुलगते हैं अँगारे ऊपर मगर खाक होती है
जुनून भी ऐसा ही दिल मे जगाओ यारों....
अंदर से सुलगते रहो ऊपर से शांत रहो प्यारों
दिल की धधकती आग में ना खुद जल जाना कभी
भूल भुलैया में कहीं तुम ना खो जाना कभी
हौसलों की परवाज़ पर तीर कमान से चलाओ
खो गया इंसान कहीं,थोड़े से इंसान हो जाओ।