आँखों में पलने दो कुछ ख्वाब यूँ ही,
अश्क भी ज़रूरी हैं चमकने के लिए।
बुलंदियों को देख समझो ये फ़लसफ़ा,
गहराई नींव की जरूरी है ऊँचाई के लिए।
उम्र बीत जाएगी यूँ ही आज कल करते करते,
कुछ पल तो निकालो खुद से गुफ्तगू के लिए।
रास्ते कभी सीधे और सपाट होते ही नहीं,
सीख लो चलने की अदा मंज़िलों के लिए।
मत सोचो क्या मिला और क्या मिलेगा ,
बस तुम सर को झुकाओ बन्दगी के लिए।