हाँ मैं बदल गयी हूँ.....

थोड़ा कुछ कहती हूँ और बहुत कुछ कहना चाहती हूँ

जो मुझसे मुह मोड़े उससे दूर रहकर उसे खुश रहने देना चाहती हूँ

हाँ मैं बदल गयी हूँ.....

थोड़ा जी चूकी हूँ और बाकी खुलकर जीना चाहती हूँ

अब लोग क्या कहेंगे ये सोचकर मैं रुकना नहीं चाहती हूँ

हाँ मैं बदल गयी हूँ.....

अभी तो सिर्फ पंख खोले हैं खुले आसमानों में उडना चाहती हूँ

अगर उडते उडते थक जाऊ तो खुद से उठकर दोबारा उडना भी चाहती हूँ

हाँ मैं बदल गयी हूँ.....