ना चाय छूटी मुझसे,

ना तुमसे सिगरेट,

आज कल दो चार कप ज़्यादा ही पी लेती हूँ,

तुम्हारे दो चार एक्स्ट्रा क़श की तरह!

हर घूँट में हमारी यादों से भरती हूँ खुदको,

जैसे तुम हर क़श में उन्हें धुआँ कर जाते हो।


(शालिनी)