बूँद-बूँद आसमान में पसरती रात शबाब पर चढ़ती रात।

अँधेरे की चादर ओढ़े जड़ कर उसमें चाँद-सितारे आसमान का चेहरा ढकती रात।

तारों के हाथों में थमाकर रौशनी ज़र्रा-ज़र्रा पिघलती रात।

स्याही बनकर, लफ़्ज़ बनकर कोरे काग़ज़ पे चलती रात।

शाँत, गहरी बूढ़ी-बूढ़ी सी सुबह को तरसती रात।

सूरज की आहट पे, चिड़ियों की चहचहाहट पे, आसमान के चेहरे से आँचल की तरह सरकती रात।

बूँद-बूँद बिखरती रात