
याद आये तुम
जैसे याद आने लगते है बच्चे
घर से बाहर जाते ही
जैसे जान लगाकर उड़ती चिड़ियाँ
को याद आते है गुलाबी चोंच वाले घोसले
जैसे डरी हुई अम्मा के सिरहाने रखा
खो जाय हनुमान चालीसा
वो टटोलती रहे मिल जाने तक
याद आये तुम
चुटकी भर नमक की तरह
मुठ्ठी भर शक्कर की तरह
ए
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