याद आये तुम
चुटकी भर नमक की तरह
मुठ्ठी भर शक्कर की तरह
एक और रोटी की भूख की तरह
खो गई हँसी की तरह
आँख में नमी भर
याद आये तुम
याद रखना समन्दर के बिलकुल
किनारे की रेत पर
ऊँगली से लिख रही हूँ इन्तजार
लहरें मिटा रही है बार बार
नाख़ून में भीतर तक भरी रेत
बिसबिसाने लगी है
तुम्हारे जाते ही देखो न
मुझे तुम्हारी याद आने लगी है.....
कविता में पकता है मन कच्ची रह जाती है ख्वाहिशें.....


