जहां न खेत और खलिहान की हरियाली हो
जहां हो घुटन और सांसो में हवा काली हो
जहां है भीड़ बहुत पर लोग तन्हा रहते है
क्या हम ऐसी रिहाइश को ही शहर कहते है।
#शैलेष त्रिपाठी


जहां न खेत और खलिहान की हरियाली हो
जहां हो घुटन और सांसो में हवा काली हो
जहां है भीड़ बहुत पर लोग तन्हा रहते है
क्या हम ऐसी रिहाइश को ही शहर कहते है।
#शैलेष त्रिपाठी