यूँ जमाने भर की सारी मुश्किलें आसान कर बैठा

सारे मतलबी रिश्तो को बस अनजान कर बैठा

बड़ी हसरत थी दिल की फिर बच्चों सा मुस्कुराने की

इसी हसरत को फिर जीने को दिल नादान कर बैठा

#शैलेष त्रिपाठी