जीवन के हर पल में जिसकी पूरी भागीदारी है
जिसकी सृष्टि को जीवित रखने की जिम्मेदारी है
वो ईश्वर की अद्भुत रचना, सब रचनाओं पे भारी है
माँ, बेटी, बहना, अर्धांगिनी हर स्वरूप में नारी है।
नारी जब तक है जग में तब तक ही किलकारी है
जिनकी गोद मे जीवन पलता,ममता जिसकी न्यारी है
शकुंतला, सीता ,यशोधरा ,कुंती ,हिडिम्बा, पार्वती
जैसी माताओँ की ममता सब देवत्व पे भारी है
उर्मी, द्रौपदी, जनकनंदिनी और देवी दुर्गा, पार्वती
सावित्री अपने पतिव्रता व्रत से यमराज पर भारी है
जो है बस सम्मान के लायक प्रेम की बस अधिकारी है
माँ ,बेटी बहना अर्धांगिनी हर स्वरूप में नारी है।
सती, गंगा, सरयू ,संध्या और बेटी द्रुपद कुमारी है
बेटी बन कुलगौरव को बढ़ाया ऐसी जनक दुलारी है।
जो है बस सम्मान के लायक प्रेम की बस अधिकारी है
माँ ,बेटी बहना अर्धांगिनी हर स्वरूप में नारी है।
©शैलेष त्रिपाठी


