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मेले


मेले,यह भीड़ के संगम हैं

इनमे अपने आपको तलाशते,भटकते नौजवान

दौड़ाते हैं नज़रे,किसी की नज़र में आने को ।।

— • शैलेन्द्र गंगवार
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