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छोटे घर


छोटे से घरों में दिल बड़ा रखते थे लोगएक दिन की तनख़ा से पलते थे लोग

ना किसी फिक्र थी जमाने की विलासता कीबस यूंही शाम को आंगन में तारे गिनते थे लोग ।।

— • शैलेन्द्र गंगवार
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