शोर हर तरह था सामना जब भी होगा
जलते इस इस रणभूमि में सकुनी ही घी होगा
जलेगा सारा कुरुवंश बचेगा एक ही अंश
मुरलीधर जिस ओर होगा,विजयी वहीं होगा
पितामह थक कर बोले, बैर के इस भवर से
दुर्योधन जो सोच रहा अब बस वहीं होगा
बिगुल का शोर होगा ,युद्ध घनघोर होगा
नर का संहार करने ,निकलेंगे कुछ राजप्रेमी
अर्जुन एक ओर होगा,गुरू द्रोड़ दूसरी ओर
नियति जो चाहेगी, अब बस वहीं होगा
शंखनाद के भय से
कुछ कुल ने सरहद बांध लिए
कुछ ने घर बार को त्याग दिया
कुछ ने पर्वत को लांघ लिए
कुछ का कहना भी सही हुआ
जो होना था बस वहीं हुआ
कुछ ने बस चिता को आग दिया
कुछ ने बस दमन को दाग दिया
कुछ बातों पर ये युद्ध हुआ
युद्ध में क्या कुछ नही शुद्ध हुआ
कुछ का ढहना भी सही हुआ
जो होना था बस वही हुआ

