तेरे ना मिलने का कोई ग़म नही 

 मुद्दतों से तो उदासी छाई है

 बस कर ए दिल ! उठ और दौड़ लगा

 कौन सी ये पहली दफ़ा आई है


जो मैंने चोट खाई है,उसका

ना कोई मरहम है ना कोई दवाई है

मुफत में ही बिक़ गए मेरे जज्बात

इन सब से हार कर ही मैंने ये क़लम उठाई है