धीरे धीरे दीमक बन रही है जिंदगी

मिट्टी का घर देकर ,पानी चुन रही है जिंदगी


आहिस्ते 2 पानी में उतर रही ज़िंदगी

मुझे प्यासा छोड़ ,सागर लिए चल रही ज़िंदगी


सिर में शोले लिए चल रही ज़िंदगी

पाँव में गोले लिए चल रही ज़िंदगी

रास्ते के हर एक मोड़ पे फ़िसल रही ज़िंदगी

फिर भी मिलों को अपने उसूलों से निगल रही ज़िंदगी


कितना आसान है ये कह देना, कि रास्ते में है ज़िंदगी 

कोई तो कह दे कि तुम्हारे वास्ते है ये ज़िंदगी

बेबुनियाद किसी ने बताया है तुम्हारा भरोसा ए ज़िंदगी

क्या इसी भरोसे के वास्ते टिकी है ये ज़िंदगी


 लगता है तुम्हें अकेले छोड़ ,फ़ायदे में है जिंदगी

ए कालिन्दी, उसके नज़रिए से देख, तो क़ायदे में है जिंदगी