सुध-बुध खो दी दीवाने बन गए

आग लगा दी कारोबार में हमने।


गली-गली भटके कूचा-कूचा पूछा,

ढूंडा तुझको हर नुक्कड़ हर बाज़ार में हमने।


यकीं था हम को आएगा आख़री मुलाकात करने,

मौत की ख़बर भी छपवाई हर रिसाले समाचार में हमने।


मर गए खुली रखी आंखें तेरे इंतेज़ार में हमने,

ले देख ज़ालिम क्या-क्या न किया तेरे प्यार में हमने।


~hilal hathravi