Poetry 1 min read 787.9K reads

हादसा


एक हादिसाहुआ था कई बरस पहले,दर्द अब भी उठता है,रुक-रुक के खिंच-खिंच के सीने में।ये दर्द है तो कट रही हैज़िन्दगी भी किसी तरह,वरना फिर क्या मज़ा बस जीने में।

— हिलाल हथ'रवी
Read more Earn more Learn more