ज़ुबाँ में शीरीं,

दिल में अहसास पैदा कर।


कोई तेरा बन जाये,

किसी का तू हो जाये

ऐसा साज़ पैदा कर।


अभी घर से निकला है

नुकीले रास्तों की परवाह न कर,

मंज़िल ख़ुद खिंची चली आये,

ऐसा आग़ाज़ पैदा कर।


बात अच्छी हो सच्ची हो

लाज़िम है कि दो-चार सुनें,

पूरी दुनिया मजबूर हो उठे

तुझे सुनने के लिए,

सीने में ऐसी आवाज़ पैदा कर।


मंज़िल ख़ुद खिंची चली आये,

ऐसा आग़ाज़ पैदा कर।


~हिलाल हथ'रवी