जिंदगी में इक वक्त ऐसा आया,

जब अंधेरों ने मुझे घेर लिया

मैं गुमराही में ग़र्क हो गया

तारीकियाँ मुझ पे काबिज़ हो गईं

मेरी तन्हाई, मुझे अंदर ही अंदर खाने लगी

नशे की लत, दीमक की मानिन्द चाटने लगी

हर तरफ अंधेरा था, फ़कत अंधेरा

मुझ को लगने लगा था, यही अंत है मेरा

फिर इक उम्मीद की रोशनी नज़र आई

जो मुझे अंधेरों से उजालों में लाई

वो तू थी माई, वो तू थी माई

जो मुझे अंधेरों से उजालों में लाई

वो तू थी माई, वो तू थी माई


ayan_saab

اعئان صاحب