अन्याय को ललकार दो !
अब ज्ञान का यलगार हो !
कुछ सत्य का,
कुछ धर्म का,
वीभत्स हाहाकार हो !
झुण्ड सा एक ज्वार हो,
जो काल का पतवार हो !
बलिदान की ग़र पुकार हो,
उसे मृत्यु भी स्वीकार हो!
निश्चय की अब हुंकार लो,
और थाम लो संसार को।
कलियुग में दैवी तेज का- ॐकार हो !
ॐकार हो !
ॐकार हो !
ॐकार हो !