अन्याय को ललकार दो ! अब ज्ञान का यलगार हो ! कुछ सत्य का, कुछ धर्म का, वीभत्स हाहाकार हो ! झुण्ड सा एक ज्वार हो, जो काल का पतवार हो ! बलिदान की ग़र पुकार हो, उसे मृत्यु भी स्वीकार हो! निश्चय की अब हुंकार लो, और थाम लो संसार को। कलियुग में दैवी तेज का- ॐकार हो ! ॐकार हो ! ॐकार हो ! ॐकार हो !