तस्वीर
जुल्मो सितम की दास्ताँ ले के पैदा हुई हू मैं
मजबूरी का नाम देकर पैदा हुई हूं मैं
क्या मेरे अरमाँ मेरे सपने नहीं होंगे जीने के
क्या हक़ नही मुझको जीवन के दो घूट पीने के
मैं भी तो बन सकती हूं तेरे सपनो की ताबिर ओ मां
क्यों हर बार भईय्या ही की ओर देखती हो तुम मां
थोड़ा विश्वास थोड़ा यकिन मुझमे भी दिखाओ ना मां
मैं भी तेरे सपनो को पुरा कर दिखाओंगी ओ मां
मैं हूं एक नन्ही कली तो क्या
फूल बनकर एक दिन तेरे गुलशन को मह्कऔंगी अए मां
कहते हैं हमे दुर्गा, सरस्वती, लक्ष्मी का रूप हो तुम
पर क्या ऐसा बनने देने की चाहत भी कोई रखता है क्या
हमे भी बनना है देश की ताकत
हमे भी बनना है इस देश की चाहत
मौका हमे भी देना होगा साथ अपने पुरूषो को हमे भी लेना होगा
गर इस बगिया को सजाना है तो इस फूल को भी अपनाना होगा
तोडी है हमने दासता की हर जंजीरों को
अब तो कदम पीछे नहीं लेना है हमें
छूना है आकाश 'शाह ' उड़ जाना है हमें
नये भारत में बदलाव की तस्वीर बनाना है हमें
शाहनवाज अहमद"शाह"


