रूठ जाने की फितरत नहीं है मेरी ,
आज रूठ जाने की ख्वाहिश रखता हूँ मैं
तुझसे बिछड़ने का सोचा नहीं था कभी,
आज बिछड़ने की बात करता हूँ मैं
जिसकी बातों से ही होती थी सुबह कभी,
जिसकी आँखों में होती थी खूबसूरत सी शाम
दूर जाने की हसरत लिए हुए हैं बैठा,
पतझड़ सी हो गई हैं जिंदगी अपनी तमाम..........


