"कहो ना-कोरोना " 

इस कोरोना ने लिखी जिंदगी की नई कहानी हैI 

ढूंढ रहा हूँ मैं मानव अपने जीवन की आस 

सिमट रही हैं मेरी साँसे खो रहा हूँ विश्वास 

आज अँधेरा घना हो रहा,पर सूर्य निखरता आएगा 

बादल जो श्यामल छाया है,बरस-बरस हरियाली लायेगा II

जीवन अवरुद्ध हो सिमट गई हर वाणी है I

खुले आकाश में रहनेवाले,खोज रहे हैं घरो की चाहरवाणी हैं  

चेहरे पर नकाब पहने, हाथो में दस्तवानी है 

आँखों में भय और पेशानी पर परेशानी है II

मर कर भी जिन्हें नसीब न कब्र न शमशानी है 

इस कोरोना ने लिखी जिंदगी की नई कहानी है 

कल तक जो मिलते थे गले “शाह” हमसे तपाक से 

आज दूर से ही राम-राम और सलाम जुबानी है  

इस कोरोना ने लिखी जिंदगी की नई कहानी है II


शाहनवाज़ अहमद”शाह”