”आज की नारी”
मन में उम्मीदों का आकाश है
चेहरे पर चमक तो आँखों में आत्मविश्वास है
मैं तो आज की नारी हूँ
मुझमे हर पल उड़ जाने का अहसास हैII
मैं तोड़ का हर पिंजड़ा उड़ जाउंगचाहे लाख राह में आये मुश्किलें
न ठहरुंगी, न अब घबराउंगी
मैं तो आज की नारी हूँ
दूर आसमान में मैं अपनी जगह बनाऊंगी II
दासता की जंजीरों को तोड़ा है हमने अब कदम पीछे नहीं लेना है मुझको
छूना है आकाश 'शाह ' उड़ जाने की अब चाहत है मैं तो आज की नारी हूँ
लाख रुकावटे आये मैं अपनी बात बताती हूँ II
शाहनवाज़ अहमद “शाह”
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