चाहे कितनी भी कड़वी हो
दवा हम पी ही जाते है...
मगर कड़वा सच सुनने से
हमेशा मुकर जाते है.
मुँह बना कर दवा पीते है
की तबीयत सुधर जाए,
लेकिन बहाना बना कर 
निकल जाते है,
की सच सुनना न पड़ जाए.

आजकल सारी दवाओं के नाम 
हमें यूँ ही याद रह जाते है
बस अपने जहनो दिल में बसी
बीमारियां नही समझ पाते है.

शहरयार नीरज