अक्सर मुझे
आईना दिखाती है ये दुनिया,
मैं अगर भूल भी जाऊँ
तो याद दिलाती है दुनिया.
मेरी हर कमी , हर नाकामयाबी
मुझे सुनाती है ये दुनिया,
हर ग़लती की सज़ा बिना भूले
सुनाती है ये दुनिया.
देखा, 
कितना खयाल रखती है ये दुनिया
तू ख़ामख़ा ही नाराज़ रहता है
शहरयार...
अपना सब काम छोड़कर सिर्फ 
तेरी ओर ही तो
ध्यान देती है ये दुनिया.

शहरयार नीरज