पता नही क्यूंअक्सर मन मारना पड़ता हैजहाँ जीत सकते थेवहाँ हारना पड़ता है.जिम्मेदारियों में बंध गया हैये शहरयार यारों...आज और आगे की सोच मेंअक्सर अतीत को भूलना ही पड़ता है.शहरयार नीरज
पता नही क्यूंअक्सर मन मारना पड़ता हैजहाँ जीत सकते थेवहाँ हारना पड़ता है.जिम्मेदारियों में बंध गया हैये शहरयार यारों...आज और आगे की सोच मेंअक्सर अतीत को भूलना ही पड़ता है.
शहरयार नीरज