---------दोस्तों आज आधुनिकीकरण अपने चरम पर है । प्रत्येक इंसान प्रति-पल इस कोशिश में लीन है कि कैसे वो अपने सपने को पूरा करे । साथ ही हर एक व्यक्ति की ख्वाहिश है कि उसका घर- परिवार और वो खुश एवं सुखी रहें । लेकिन दोस्तों क्या हम इतनी कोशिशें और प्रयत्न के बावजूद खुश रह पाते हैं ?????, ------------शायद नहीं ।
-----------तो दोस्तों अगर हम खुश नहीं रह पाते हैं तो क्या इसके लिए परिस्थितियाँ दोषी हैं या हमारे महसूस करने में कमी है या फिर खुशी के प्रति हमारे नजरिए में किसी प्रकार की विचारधारा का अभाव है । चूँकि जिंदगी का निर्माण ही परिस्थितियों से हुआ है या यूँ कहें कि विभिन्न परिस्थितियों से ही जीवन की विविधता का सृजन होता है। लेकिन जीवन की बिडम्बना ये है कि किसी की परिस्थितियाँ हमेशा अनुकूल नहीं रहती हैं और फिर हमारा चंचल मन हमें अज्ञात की तलाश में भटकाता है ।
-------हमारी खुशी की राह में सबसे बड़ी रुकावट क्या है - ?????, वह है “मन की चंचलता और अस्थिरता” । जो हमें केंद्रहीन किए रखती है । मन मुताबिक वस्तु के मिल जाने पर या इच्छानुसार कार्य हो जाने पर, वास्तव में हम कितनी देर खुशी महसूस कर पाते हैं - - -???
शायद चंद पल भी नहीं - - - - क्यों -????, क्योंकि चंचल मन में स्थिरता की कमी है, मन रुकना, महसूस करना और मौज-मस्ती करना चाहता तो है पर आंतरिक बेचैनी के प्रभाव में ठहराव और चैन-सुकून को महसूस नहीं कर पाता । जो अभी-अभी मिला है उसको दिल से जीने के बजाय, अपनी इच्छा पूरी होते ही, हम उससे आनंदित न होकर, अगली इच्छा पूर्ति के लिए निकल पड़ते हैं, फिर अगली इच्छा - - - - - - ।
----------हर बार नयी चाहत, नयी ख्वाहिश, नयी इच्छा - -, यदि इच्छा पूरी न हो तो खुशियाँ वहीं पर अटकी सी रह जाती हैं । लगता है काश!!! अगर मेरी यह अभिलाषा पूरी हो जाए तो - - - -, मैं चैन से रह सकूँ पर फिर से दूसरी इच्छा, और यह सिलसिला जीवन-पर्यंत, साँसों के थमने तक चलता रहता है ।
-------सुख की राह में सबसे बड़ी बाधा है - - - - “दूसरों के सुख से दुःखी होना ।” - - यानि उस चीज की हमें चाहे भले जरूरत न हो पर दूसरे के पास उस वस्तु को देखकर खुद के मन में हीन भावना या जलन का जागना और परेशान रहना । बोले तो नकल करना और दूसरे के जैसा बनने का प्रयास, जबकि ऐसा नहीं है, हो सकता है जैसे आनंद और सुख की उपस्थिति का आभास हम सामने वाले के पास करते हैं, हकीकत उससे परे हो क्योंकि किसी ने शायद सही कहा है कि —“दूर के ढोल हमेशा सुहाने लगते हैं ।” - - - जरूरी नहीं कि जो दूर से हमें सुखी और प्रसन्न दिख रहा है, उसे सच में कोई दुःख या ग़म न हो ।
-------दोस्तों अब प्रश्न उठता है कि हम इस भटकन से कैसे बच सकते हैं, हम कैसे जीवन में कुछ पल खुशी और आनंद के साथ बिताएं या यूँ कहें कि खुशी से जिंदगी जिएं - - - - - । - - - दोस्तों पहली बात तो हमें इच्छाओं की लगाम पर अपनी पकड़ मजबूत करनी होगी । अपनी इच्छाओं को नियंत्रित रखते हुए हमें जिंदगी के सफर में हासिल खुशी को, ठहराव के साथ, मन की एकाग्रता, आत्मिक सुकून और परम संतुष्टि के साथ महसूस करना होगा । “संतुष्टि” एक वरदान है जिसे हमें महसूस करने की जरूरत है क्योंकि बिना “मन की संतुष्टि” के ‘खुशी की अनुभूति’ होना सम्भव नहीं है ।
-----अब खुशी को महसूस करने में दूसरा सबसे बड़ा खलल है हमारी चिंता। जब हम अपनी खुशी के लिए कुछ भी शुरू करने की सोचते हैं तो हमारे अंदर ये चिंता घर कर लेती है कि “हम ऐसा करेंगे तो दुनिया क्या सोचेगी”, जबकि सच तो ये है दोस्तों कि आपके आस-पास की दुनिया दो तरह के लोंगो से घिरी हुई है, पहले में ऐसे लोग हैं जो आपको तवज्जो देते हैं, आपसे प्यार करते हैं और दूसरे में ऐसे लोग हैं जो आपसे नफरत करते हैं और हमेशा आपकी बुराई, निंदा और आलोचना करने के मौके की तलाश में रहते हैं ।
-----अब पहले प्रकार के लोग, आप चाहे जो करोगे, “अपनी खुशी के लिए” , आपके साथ हमेशा रहेंगे (बस आपका कार्य सही और किसी को दुःख या हानि न पहुंचाये, ऐसा हो) । जबकि दूसरे प्रकार के लोग आप चाहे जितना अच्छे से अच्छा काम करोगे ये कोई न कोई तथ्य, निंदा के लिए खोज ही लेंगे मतलब आप ऐसे लोंगों को कभी संतुष्ट नहीं कर सकते हैं और वर्तमान में इंसान के दुःख की सबसे बड़ी समस्या यही है कि ‘दुनिया क्या कहेगी, मेरे बारे में क्या सोचेगी ।’अरे भाई ऐसे लोगों को भूल जाओ इसी में भलाई है क्योंकि---
---“कुछ तो लोग कहेंगे, लोंगो का काम है कहना - -
छोड़ो बेकार की बातें, कहीं बीत न जाए रैना - - - -
कुछ तो लोग - - -
----दोस्तों ऐसे लोंगो को संतुष्ट करने में खुद को कष्ट न दें । खुद को चैन, सुकून और खुशी देने के लिए कोई चेष्टा न छोडें बस इतना ध्यान रहे कि आपकी ये चेष्टा किसी का अहित ना करे । खुद से वा खुद के जीवन से प्यार करें और कल के चक्कर में, खुश रहने का कोई भी अवसर व्यर्थ न गंवाये । क्यूंकि-
-----सोचना क्या, जो भी होगा देखा जाएगा - - -
कल के लिए, आज को न खोना
कल जो है फिर आएगा, सोचना क्या - - - - -
---हमेशा सिर्फ खुद से ही अधिक बेहतर की उम्मीद रखना, ना कि दूसरे से बदलने की या बदलाव की उम्मीद । तुलना सिर्फ स्वयं से की जाय, खुद का स्थापन्न खुद में तलाश करो, दूसरों में नहीं । पहले से खुद को और बेहतर बनाने का प्रयास करें । किसी से खुद की तुलना करना व्यर्थ है । इस दुनिया में कोई पूर्ण-रूपेण सुखी नहीं है । सब के जीवन में कोई न कोई त्रुटि जरूर है किसी का जीवन सम्पूर्ण नहीं है, तो इसकी सम्पूर्णता के फेरे में न पड़ें ।
आपकी खुशी के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण है—“संतुष्टि एवं सकारात्मक विचार और नजरिया” । हमेशा सकारात्मक और आशान्वित लोगों के साथ रहने की कोशिश करिए, नकारात्मक सोच रखने वालों लोगों से दूर रहिए ।
----अपनी हकीकत को स्वीकार करके, दिखावे को त्यागकर, नजर को सकारात्मक पक्ष पर रखते हुए, अपने जीवन को खुशी, सुकून और ईश्वरीय कृपा से पूरित महसूस करके तो देखिये । ये जीवन बहुत ही खूबसूरत है । किसी ने सही लिखा है कि –
-----जिंदगी एक सफर है सुहाना---
----- यहाँ कल क्या हो किसने जाना –
-----तो दोस्तों---
----------------छोटे से छोटे पल को जीना सीखो,
------------खुशी के हर मौके को संजोना सीखो,
---------जिंदगी खुशियों से भर जाएगी ।।
-------Shashank Mani Yadava'सनम'


