दुनिया में आलीशान
सबसे निराली इसकी शान ।।
न इसके जैसी महिमा
न इसके जैसे कहीं इंसान ।।
अद्भुत, अतुलनीय और विराट है इसकी छवि
विश्व गुरु होने का मिला है इसे मान ।।
शायद, तभी तो हम कहते हैं,
गर्व से, मेरा भारत महान ।।
इसकी महानता में अब
चार चाँद लग गए हैं ।।
यहाँ के इंसान ही अब,स्वयं
भगवान बन गए हैं ।।
अब यही इंसान करते हैं
भारत के भाग्य का निर्माण ।।
और उन्हीं के हांथों में है
इस देश की उन्नति, अवनति, पतन और उत्थान ।।
शायद, तभी तो हम कहते हैं,
गर्व से, मेरा भारत महान ।।
अब यहाँ गाँवों की
तहजीब सिमट रही है ।।
जो आदर, कभी सुबह उठकर
माँ-बाप के पैर छूने में पनपता था ।।
वो अब गुड मॉर्निंग माम और
गुड मॉर्निंग डैड में बदल रही है ।।
यहाँ इसीलिए अब देखो
माँ-बाप के लिए बनाए जाते हैं
वृद्धाश्रम, खूबसूरत और आलीशान ।।
शायद, तभी तो हम कहते हैं,
गर्व से, मेरा भारत महान ।।
घरों के अस्तित्व के,
अस्तित्व, पर सवाल है ।।
तेरी दीवार में, अपना एक इंच न दूँगा
इसी बात पर सुबह से शाम तक
लाठी-डंडों से, भाई-भाई में हुआ बवाल है ।।
अब पड़ोसी, पड़ोसी के दर्द बढ़ाता है ।।
बदले की आग में, उसकी बेटी को भगाता है ।।
अब दिखती नहीं है, मोहल्ले में पहले जैसी
शानो-शौकत, आन, बान और शान ।।
शायद, तभी तो हम कहते हैं,
गर्व से, मेरा भारत महान ।।
अब नहीं समझते हैं लोग यहाँ
धरती को अपनी माता, और
प्राणदायिनी नदियों को भाग्यविधाता ।।
तभी तो लोग शौक से करते हैं
इन नदियों के पावन जल में
नित्य, प्रति-पल, सदा मल-मूत्र का त्याग ।।
और धरती की उर्वर गोदी में
हमेशा करते रहते हैं कूड़ा-दान ।।
और फिर चलाएंगे योजना, ‘स्वच्छ भारत अभियान’
शायद, तभी तो हम कहते हैं,
गर्व से, मेरा भारत महान ।।
पहले एक की, पुकार पर, दस लोग बचाते थे
अब एक को मिलकर, दस लोग मारते हैं ।।
साथ में माँ, बहन, बेटी को
गालियों से नवाजते हैं ।।
धर्म के नाम पर, पीट-पीट कर
लोग मार दिए जाते हैं ।।
सत्ता की लालच में, नेताओं द्वारा
चुनाव में दंगे, करवा दिए जाते हैं ।।
फिर लेते हैं सपथ, हम, बनाएंगे इस देश को
संप्रभु, अक्षुण्य और ऊर्जावान ।।
शायद, तभी तो हम कहते हैं,
गर्व से, मेरा भारत महान ।।
अन्नदाता यहाँ, कर्जे से आत्महत्या कर रहा है
घर बनाने वाला, खुद बेघर भटक रहा है ।।
कपड़े बुनने वाला इंसान, दो जोड़ी में दिन काट रहा है
और बेचने वाला हर महीने, ब्रांड बदल रहा है ।।
अनाज का आयात-निर्यात यहाँ, करोड़ों में होता है
पर कैसी ये विडंबना है कि, यहाँ आज भी इंसान
रातों में, भूखा, पानी पीकर सोता है ।।
फिर भी हम फक्र करते हैं कि, ये धरा है कृषि प्रधान
शायद, तभी तो हम कहते हैं,
गर्व से, मेरा भारत महान ।।
चंद पैसों के लिए, यहाँ इंसान लुट जाता है
दलाली, चापलूसी व घूसखोरी में ईमान बिक जाता है ।।
वेतन पर्याप्त है फिर भी पेट नहीं भरता
और जब तक न मिलें बाबुओं को साइन की फीस
तब तक कोई भी केस आगे नहीं बढ़ता ।।
दस-दस रुपये के लिए हज़ारों झूंठ बोलते हैं
बहाने ऐसे बनाएंगे जैसे, इन्हीं पैसों से,
इनके घर चूल्हे जलते हैं ।।
धूर्तता और कामचोरी की, ये सारी हदें पार करते हैं
फिर भी समाज में बड़े शान से होता है
इन्हीं का आदर-सत्कार, मान और सम्मान
शायद, तभी तो हम कहते हैं
गर्व से, मेरा भारत महान ।।
यहाँ आँकड़ों में गरीबी दूर हो जाती है
अश्लील वीडियो से औरतें मशहूर हो जाती हैं ।।
पैसों के लिए, हाँ, शायद पैसों के लिए
यहाँ अब फिल्में बनाई जाती हैं ।।
जो दिखता है वही बिकता है, बस इसी तर्ज़ पर अब
इज्जतदार और सम्मानित घरों की बेटियाँ
अभिनय के नाम पर नग्न दिखाई जाती हैं ।।
ये भी बेहयाई से, पूरा जिस्म दिखाती हैं
मगर कोई एक नजर देख ले एकटक, घूर के
तो ये पूरी तरह से सती-सावित्री बन जाती हैं ।।
और इन जैसों के कारण ही, आज भी नहीं मिल रहा है
सभ्य समाज में, महिलाओं को
उनका, हक, अधिकार और आत्म-सम्मान ।।
शायद, तभी तो हम कहते हैं,
गर्व से, मेरा भारत महान ।।
न्याय के मंदिर में अन्याय की भोर होती है
प्रतियोगी परीक्षा और बलात्कार पर बहस होती है ।।
चंद पैसों के लिए यहाँ पेपर बिक जाते हैं
बेचकर ईमान, यहाँ वकील, बलात्कारी को बचा लेते हैं ।।
गिरते-गिरते, इतना नीचे गिर गए, ये कानून के वाहक
झूठ को सच, सच को झूठ बना देते हैं ।।
इज्जत लूटने वालों को, इनकी दलीलें बचा लेती हैं
और कटघरे में खड़ी निर्दोष व चरित्रवान औरत को
डॉक्टर, पुलिस और वकील की तिकड़ी
बेशर्म, बेहया, वेश्या बना देती है ।।
फिर ये नीच करते हैं पुरुषार्थ का दंभ
और हर्ष-उल्लास में करते हैं जी भर के मदिरा-पान ।।
शायद, तभी तो हम कहते हैं,
गर्व से, मेरा भारत महान ।।
कृष्ण यहाँ गलियों में अब चीर-हरण करता है
राह जाती बेटियों के सीने पर हाथ रखता है ।।
मर्द कहलाने वालों के सामने ही
घरों की इज्जत लूट ली जाती है ।।
खुद को शिक्षित, संपन्न और खुद्दार समझने वालों के यहाँ
दहेज के लिए पीटकर-पीटकर
बहुएं जिंदा जला दी जाती हैं ।।
इतने से पेट नहीं भरता, ये बच्चियों का रेप करते हैं
हैवानियत की हदों को पार करके फिर
इंसानियत का बलात्कार करते हैं ।।
हर अंगों पर, अपनी बर्बरता की अमित छाप छोड़ते हैं
खुद की तृष्णा बुझाने के लिए, लौह वस्तुओं से
गुप्तांगों को खरोंच देते हैं ।।
और ऐसे ही नर-पिशाचों को बचाने के लिए
यहाँ, न्याय के दरबार में, सैकड़ों ‘निर्भया’ और ‘दामिनी’ का
होता है, बार-बार बलात्कार और अपमान ।।
शायद, तभी तो हम कहते हैं,
गर्व से, मेरा भारत महान ।।
देखा नहीं है किसी ने, फिर भी भगवान को सब मानते हैं
गीता में, कुरान में, उसकी महिमा तलाशते हैं ।।
पर इन्हीं किताबों के लिए अब झगड़े होते हैं
खुद को श्रेष्ठ बताने में, लोग एक-दूसरे को काटते हैं ।।
हर गली, हर मोहल्ले में अब आतंक दिखता है
राम, रहीम का और रहीम, राम का खून पीता है ।।
नफरत की आग में, पूरा देश जल रहा है
‘हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई’ का भाई-चारा
अब तिल-तिल कर, दम तोड़ रहा है ।।
नहीं दिखता, अब ईद पर राम का गुमान
और होली पर रहीम भाई का स्वाभिमान ।।
शायद, तभी तो हम कहते हैं,
गर्व से, मेरा भारत महान ।।
ईश्वर का रूप, डाक्टरों में, अब नहीं रही मानवता
जान चली जाएगी मगर, इलाज उसी का होगा
जिसके द्वारा ऑपरेशन का एडवांस जमा होता ।।
गरीब की बीमारी अब, डॉक्टर्स की कमाई है
कितनों ने तो इसकी खातिर, किडनी बेच खाई है ।।
अब हर इलाज की, कीमत तय होती है
शायद इसलिए, हाँ शायद इसीलिए
आज भी,अस्पताल के बाहर,माताएँ बच्चों को जन्म देती हैं ।।
सरकारी सुविधाओं के नाम पर करोड़ों खर्च होते हैं
कागजों में सारे अस्पताल सुविधाओं से लैस होते हैं l
फिर भी यहाँ बिना ऑक्सीजन के, चली जाती है
नौनिहालों और मासूमों की जान ।।
शायद, तभी तो हम कहते हैं,
गर्व से, मेरा भारत महान ।।
हिंसक हो जाए जानवर तो, उसे गोली मार देते हैं
थोड़े से स्वाद के लिए, जिंदा जला देते हैं ।।
पर कसाब, अफजल जैसे लोग को पूरा सम्मान मिलता है
जिनकी गोलियों से, आज भी हिन्दुस्तान रोता है ।।
इनको ऐसे खिलाएंगे, जैसे ये दामाद हों
और हेल्मेट न लगाने वालों को ऐसे पीटेंगे
जैसे वो ‘सुरेंद्र कोहली’ जैसे नर-पिशाच हों ।।
आम इंसान कुछ करे तो, मानवाधिकार का हनन है
आतंकवादी हजारों मारें, पर वो मजहब और धरम है ।।
ऐसे ही मजहब चलाने वालों का यहाँ बोलबाला है
अगर कोई सच बोले तो फिर, उसका मुख काला है ।।
और ऐसे ही अजेय, अपराजेय, मनुज होने लगे हैं
आज सत्तासीन, पूज्यनीय और करुणानिधान
शायद, तभी तो हम कहते हैं,
गर्व से, मेरा भारत महान ।।
देख कर ये कृत्य ‘सनम’, खुद पर शर्म आती है
श्रेष्ठ नर रूपी इंसानों के कृत्यों से, आँख भर आती है ।।
खाली हांथ आया था, खाली हांथ जाता है
न जाने फिर क्यों ये इंसान, इन्सानों को नोच खाता है ।।
अब कुछ बेहतर होगा, इसकी उम्मीद ही नहीं है
पानी की कीमत समझे कौन - - ?
जब आँखों में पानी ही नहीं है ।।
देख कर सोच, अब लोंगों की, दिल रोता है
और साँस हर पल करुण-क्रंदन करती है ।।
तन बचा है इंसानी पर, उसमें अब शायद
आत्मा राक्षसों की रहती है ।।
ऐसे माहौल में अब, टूटने लगा है ‘सनम’
फिर से विश्व गुरु होने का अनुमान ।।
शायद, तभी तो हम कहते हैं,
गर्व से, मेरा भारत महान ।।
---------Shashank Mani Yadav‘सनम’---------


