वो नज़र हमसे  मिलाते  हैं, चले जाते हैं

इक हसीं ख़्वाब दिखाते हैं, चले जाते हैं


उनको डर है कि न आ जाए कोई दीवाना

नक़्श  पैरों  का  मिटाते  हैं, चले जाते हैं


यूँ तो आते हैं वो बारिश में नहाने लेकिन

आग  पानी  में  लगाते  हैं, चले  जाते हैं


जब भी जाते हैं कभी जानिब-ए-कू-ए-जानाँ

उनको  आवाज़  लगाते  हैं, चले  जाते हैं



उनके ख़्वाबों ने भी सोने न दिया मुद्दत से

नींद  आँखों  से  चुराते  हैं, चले  जाते हैं


इश्क़ वालों की है दुनिया में बस इतनी हस्ती

हुस्न  का  नाज़  उठाते  हैं, चले जाते  हैं


हमने जाना भी तो "शादाब" बस इतना जाना

जो भी इस दहर में आते हैं, चले जाते हैं