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साहित्य का सिपाही

ना मै राहत इंदौरी हू और ना ही गुलजार हूं
साहित्य का सिपाही और छोटा सा कलमकार हूं।

कभी इश्क कभी जुदाई कभी प्यार लिखता हूं
मैं कुछ भी लिखूं पर तुझे हर बार लिखता हूं।

मेरे हर्फ कभी पढ़ना और उनको फिर समझना
कभी प्यार कर के देखो और उसमे फिर तड़पना।

इस खुश्क से मौसम में तन्हाई रुला देगी
जिसे भूल चुके हो तुम बो याद दिला देगी।

खयालों में उसके खोकर तु
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