थोडा हो जाइऐ सन्जीदा

आज कल बाजार मे आई है आफत नयी..  

   

देखने मे है कुछ जानी पहचानी     

ओर कभी लगती नयी- नयी..


हर दुकान ओर चबूतरे पर उसका ठिकाना

करे पसंद सब उससे बचना बचाना... 


हो गया हमसे भी आमना सामना उसका       

हम भी बोले कोन हो कहाँ से आई?


पूछने पर बोली...मै हूँ तुम्हारी महंगाई ताई, 

आयी हूँ तुम सबको सबक सिखाने .. .

    

घर दुकान और बचे खूड तक बिकवाने,

अब ऐक बच्चे से ज्यादा नही पाल पाओगे..


बस मेरे चरणो मे सलाम बजाते रह

जाओगे,

          

आई हूँ तो अब नही जाऊंगी..          

यही है आखरी ठिकाना,

बस यहीं बस जाऊंगी..


कसुर हमारा तो बताना..

क्यो हो खफा- खफा जरा कह सुनाना,


गलतिया तो तुम बेशुमार करते हो            

और फल भोगने से डरते हो..


पहले करते बोट का गलत इस्तेमाल,

फिर बैठ जाते हो दबाकर कान.. 

           

अपनी ताकत दूसरो को थमाओगे           

तो इसी तरह मेरे बोझ से मारे जाओगे


नही देती मोका बार बार..

अभी भी वक्त है बचालो अपना घर बार.

@ShabdMalaVidushi ph+61413955365