वक्त बढता रहा ,उम्र घटती रही
रिस्ते सिमटते रहे,बदगुमानी पनपती रही
सफर चलता रहा, ख्वाहिशे बढती रही
दोस्त छूटते रहे, भीड जुटती रही...
स्वार्थ पनपता रहा, शान्ति सिमटती रही
बेखयाली बढती रही, इन्सानियत घटती रही..
जिन्दगी नये दौर मे,बस इस तरहा चलती रही,,
@ShabdMalaVidushi
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