शब्द ना कोई अल्फाज,बता पायेंगे

मेर उस दर्द की इन्तहा को

जिसे तेर जाने के बाद गुजरे है हम

कैसे दे,दे अभी से..

हसॅ कर विदाई,तुम्हे हम

अभी तो उस वक़्त के दायरे

से भी नही उभरे है हम...

लगेगा वक्त सम्मलेन मे

अभी तो अपने कदमो

की तरह बस देखे है हम..

ना लफ्ज ना कोई अल्फाज

बया करेंगे...

जिस राह से गुजरे है हम..