ये जो दूर से देख रहे हो ना तुम रिश्तों का भ्रम,,ताश के पत्तों से बना महल है ये...जरा जाकर देखो करीब से,,,कैसे ढह जाएगा ये तमाशा भरभरा के....
ये जो दूर से देख रहे हो ना तुम रिश्तों का भ्रम,,ताश के पत्तों से बना महल है ये...
जरा जाकर देखो करीब से,,,कैसे ढह जाएगा ये तमाशा भरभरा के....