1 min read 814.9K reads

Poetry


मैं तो पागल का भेष बना कर देख रहा थाफिर क्या था हर हाथ में पत्थर देख रहा था

अपने दिल से उतर जाऊंगा ये मालूम ना थामैं तो उसके दिल में उतर कर देख रहा था।

Read more Earn more Learn more