कोटि करम है , क्षण भर में ना होने वाले निर्जर , जीव धैर्य रखो , समकित के पालन से होगा एक दिन केवल रवि किरणों का प्रवज्जलिकिरण परम लक्ष्य प्राप्त , निर्वाण के छंद से होगा आत्म योग का निस्पंदन मुक्ति धरा पर निवास आचरण रखो सदा सही , सम्यक हो पुरुषतार्थ भावनाये हमेशा पवित्र , प्रभु पर रखो विश्वास , स्वयं पर आत्मविश्वास , होगा आपके जीवन का . निरंतर विकास