पहला पाठ..... जब जिंदगी तुझ को पढ़ाती है,
हंसने से पहले.......... तुझे रोना सिखाती है,
हो ना जाए....…......... हंसी में अपनी तूं गुम
उस तरा... हंसने से पहले...... तुझे रोना सिखाती है
हंसते रोते जिंदगी........... आगे बढ़ जाती है,
धीरे-धीरे..... यह रास्ता पकड़ती रहती है.........
जिंदगी की सच्चाईयों से............. यह अवगत करवाती है,
दर्द सहेज सहेज........ तेरी जिंदगी में लाती है.....
घबराता है तू.......... तिल मिलाता है तूं.......
तो यह तुझे...... पाठ रंगों का पढ़ाती है.........
हंसी तेरी..... खुशी तेरी..... कुछ लम्हों के लिए.......
थम सी जाती है.....….. .........
गमों के सैलाब में........... डूबा है........ जिस तरह
हंसते-हंसते ही....... चुपचाप इनको... सजाऊ मैं उस तरह.....
बच बच कर...... जब तू इनसे निकलना चाहेगा.........
मजा जिंदगी का....... इन दुखों को..... पार करने में आएगा,
खुशी खुद-ब-खुद...... तेरे कदमों में आएगी.........
रोने की कहा....... फिर कोई......... गुंजाइश..... रह पाएगी।।
जिंदगी की दौड़.... अपनी शर्तो पर..... तय की जाएगी।।
सीमा सूद ✍️ स्वरचित रचना
सतनाम नगर दोराहा
जिला लुधियाना।।
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