हम भी आम इंसान हैं,

हमें अपनों की कमी खलती है,

अपनों के बिना जिंदगी की,

गाड़ी कहां चलती है।।

सीमा सूद ✍️ स्वरचित रचना

दोराहा (जिला लुधियाना)