अगर मै ही ना समझी

तो कौन समझेगा

तेरे हर कदम की कीमत

क्या होगी

कौन परखेगा?


आसान नही होता

उदाहरण बन जाना

वो मिसाल बनेगा

या मिटा दिया जाएगा

वक़्त के चेहरे से,

किसी अनचाहे

ख़्वाब की तरह

कौन तय करेगा?


तुम्हारा होना,

मात्र कल्पना ना हो जाए

तुम्हारे ख्वाब,

इस जग के अँधियारे

में ना खो जाएँ

कोई तो होगा जो

इन आँखो के खवाबों की

मंजिल तय करेगा|


कोई तो होगा जो,

तुम्हारे इन मन के भावों को

बड़ी चाहत से पढ़ेगा

कोई तो होगा जो,

तुम्हारे हर कदम में

साथ तुम्हारे चलेगा

कोई तो होगा जो,

तुम्हे हर पल

अपना कह सकेगा|