ना शब्दों से बड़ा मर्ज़ कोई, 

ना शब्दों से बड़ी दवा|

चाहें तो मिश्री घोले कानो में

चाहे जो अरमानों को कर दे हवा|


सीमा एच दहिया 'धृति