हक़ है तेरा मुझ पर 

तू दिल मे मेरे बस जा

हर साँस में महसूस हो

साँसों में उतर जा

हक़ है तेरा मुझ पर

तू दिल मे मेरे बस जा


तुझको ही देखूं मैं

कोई और नजर ना आए

न पलके उठें तुझ बिन

न झुकने को आतुर हों

किसी और कि आंखों में

न कभी इनका साहिल हो

ख्वाब बन कर के

तू आँखों मे मेरी बस जा


बना कर मुझको राधा

तू मेरा कान्हा बन 

बांसुरी की धुन से

रुह को मेरी छूकर 

कुछ ऐसा जादू कर

नाच नचा मुझको

नदिया किनारे सखियों संग

उस धुन के संग संग तु

रूह में मेरी उतर जा l


सीमा एच दहिया 'धृति'