आँखों में छिपा है अरमान कोई

के दिन रात बरसती हैं आँखें, 


होंठो में सिली है बात कोई

के चाह कर भी खुल नही पाते, 


इस मौन में दबा है तूफ़ान कोई

कहीं आया तो तबाही ना फैलादे|


सीमा एच दहिया 'धृति'