तूझसे मिलना सिर्फ इत्तेफ़ाक़ तो न होगा , कुछ न कुछ जज़्बात हमारे दरम्यान तो होगा |

तूने होठों से कुछ कहा तो न होगा , पर तेरी आँखों से कुछ छुपा भी तो न होगा |

तेरी दुआ में मेरा ज़िक्र तो न होगा , पर मेरे बिना वो दुआ कुबूल भी तो न हुआ होगा |

तेरी मुलाक़ात हज़ारों लोगो हुई होगी , पर मेरे जैसा दूसरा मिला तो न होगा |

तेरे जिस्म को कई लोगो ने छुआ तो होगा , पर तेरी आत्मा पे सिर्फ मेरा हक़ रहा होगा |

तुझसे मिलना इत्तेफ़ाक़ तो न होगा |