किसी के पास थोड़ा सा वक़्त नहीं होता-
कोई किसी के लिए रुकता नहीं।
असली बात यह है-
वक़्त किसी के लिए रुकता नहीं
और हमें किसी के लिए रुकने का मौका नहीं देता।
लेकिन हम वक्त का इंतज़ार करते हैं-
मेरा नंबर कब आएगा।
मतलब हम अपने लिए ही केवल रुकते हैं,
किसी और के लिए कभी नहीं।
वक़्त की गति हमें मतलबी बना दी है।

