वह कितना बड़ा बेवकूफ़ था-

जो खुद असफल रहकर 

दूसरे को सफल करता!

 

विफल होते होते

वह मिट्टी में मिल गया।

सब सोचे कि वह मर चुका। 

 

तीन दिनों के बाद 

एक पेड़ नज़र आया।

लोगों सोचे कि 

इतना कम दिनों में

वह कैसे इतना बड़ा बन गया?

यह सोचते सोचते लोगों ने

उसका छाया में आश्रय लिए।