नीति के नीचे नीति होती है
जैसे पानी के नीचे पानी
और बालू के नीचे बालू।
लेकिन पानी कभी बदलता नहीं
और बालू भी कभी बदलता नहीं।
नीति बदलती रहती हैं-
सफ़ेद के नीचे धूसर, धूसर के नीचे काला,
काला के नीचे अधिक काला
और उसके नीचे सब कुछ अंधा।
कैसे विश्वास करू?
क्या विश्वास करू?
किसको विश्वास करू?
क्यों विश्वास करू?

