'मैं जब चला जायूँगा,

तुम्हें आसानी से दोस्त मिल जायेगा।

मैं एक नंबर हूँ,

लेकिन तुम्हारी दो तीन चार नंबर भी हैं। 

प्यार के साथ सिर्फ मेरी दोस्ती हुई थी'।

 

'यह सच है कि

शादी के पहले मेरे कई दोस्त थे-

जैसे समुंदर में लहरें उठती हैं,

लेकिन आप मेरे पुरे समुंदर है- अंतरंग मित्र।

मैं जिंदगी भर आपकी सेवा करूंगी'।

 

वह चली गयी दस साल हो चुके हैं।

वह अपने पति के लिए एक दोस्त ढूंढ़कर गयी थी।

लेकिन उसकी जगह कौन ले सकती है? 

वह थी सहयात्री, लेकिन नया दोस्त सिर्फ एक सेवक है। 

 

'अब मैं समझा बीवी क्या होती है'!