पहेली बात तो यह है-
लोग फिल्में देखना ज्यादा पसंद करते हैं,
किताबें पढ़ना नहीं।
फिल्में देखकर ही लोग सीखते हैं,
किताबें पढ़कर नहीं।
ऐसा क्यों?
एक फिल्म देखकर लोगों को पता चल जाता है कि
उन्हें क्या करना है?
फिल्मों में सभी बताया जाता है
और सोचने का मौका नहीं मिलता है।
लेकिन कोई भी किताब हमें सोचना सिखाती है
और सोचने के बाद पता चलता है कि क्या करना है!
सोचकर कौन अपना दिमाग ख़राब करेगा?
इसलिए लोग सोचना बिलकुल पसंद नहीं करते हैं!
