समय बदल जाता है,
दुनिया भी,
लेकिन हमारी आदतें कभी बदलतीं नहीं।
आदतें कोयला की तरह-
धोते रहो, धोते रहो,
लेकिन उसका काला रंग कभी जाएगा नहीं:
धोते धोते पानी ख़त्म हो जाएगा,
तब भी नहीं।
शिक्षक हमें बोलते हैं,
"सिर्फ आदतें बदलने से जिंदगी बदलती है"।
बहुत सारे छात्रों कोशिश भी करते हैं,
लेकिन फ़ायदा कुछ नहीं होता-
चूहा दौड़ और मज़बूत होती।

